अध्याय 4 गलत पहचान

लिली ने अपना छोटा-सा सिर खुजलाया। कुछ सेकंड सोचने के बाद वह बोली, “लेकिन मेरी मम्मी की तो बस मैं ही औलाद हूँ।”

उसकी बात सुनकर मिया की भौंहें तन गईं।

“तुम्हें पक्का यकीन है कि तुम्हारी मम्मी ही तुम्हारी असली—जन्म देने वाली—माँ हैं? तुम दोनों ने कभी डीएनए टेस्ट कराया है?”

डीएनए टेस्ट का नाम सुनते ही लिली की ज़ुबान जैसे बंद हो गई।

मंडी जिस तरह उसके साथ पेश आती थी, उसे देखते हुए… क्या यह हो सकता है कि मंडी सच में उसकी माँ ही न हो? यह ख़याल लिली के नन्हे दिमाग़ पर भारी पड़ने लगा।

अब उसे खुद ही यकीन नहीं रहा था कि मंडी वाकई उसकी माँ है या नहीं। फिर भी लिली किसी भी तरह साबित करना चाहती थी कि उसके भी ऐसे माता-पिता हैं जो उससे प्यार करते हैं। इसलिए उसने हैरिसन का ज़िक्र किया।

“मैंने अपने डैड के साथ डीएनए टेस्ट कराया है। मैं उनकी ही बेटी हूँ,” उसने कहा। “मेरे डैडी मुझसे बहुत प्यार करते हैं। उन्हें मैं बहुत प्यारी हूँ।”

इस पर मिया की भौंहें फिर से उठ गईं।

“मुझे तो तुम्हारे डैड कुछ खास नहीं लगते,” उसने कहा। “अगर वो सच में तुमसे प्यार करते, तो तुम्हें यहाँ अकेली रोती छोड़कर नहीं जाते।”

लिली ने दुखी होकर चेहरा नीचे कर लिया और चुप हो गई।

मिया ने मौके का फायदा उठाकर लिली के मन में एक बीज बो दिया। “देखो, हम कितनी मिलती-जुलती लगती हैं। कहीं तुम मेरी बरसों पहले बिछड़ी बहन तो नहीं? अगर हम डीएनए टेस्ट करा लें तो?”

लिली गहरी सोच में डूब गई, मानो मिया की बातों से वह डगमगा गई हो।

मिया लिली से उसकी हालत के बारे में और सवाल पूछना चाहती थी, लेकिन तभी बाथरूम के दरवाज़े के बाहर से मंडी की बेसब्र आवाज़ गूंज उठी।

“लिली, क्या टॉयलेट में गिर गई है क्या? अभी बाहर आ!” मंडी चिल्लाई। “अगर अभी नहीं निकली, तो फिर वहीं पड़ी रहना हमेशा के लिए!”

मंडी की आवाज़ सुनते ही लिली सिमट-सी गई। उसने जाते-जाते मिया को एक आख़िरी, अर्थभरी नज़र से देखा और बाहर निकलने की तैयारी करने लगी।

तभी मिया को जैसे कोई तरकीब सूझी। उसने लिली को बाथरूम के दूसरे छोर की तरफ धकेला और खुद दरवाज़े की ओर लपकी।

लिली समझ पाती, उससे पहले ही मिया बाहर जाकर मंडी के सामने जा खड़ी हुई।

उम्र छोटी थी, पर मिया का मिज़ाज तेज़ था। जिसे वह पसंद नहीं करती, उससे सीधे भिड़ जाती। जो लोग उसे अच्छी तरह जानते थे, वे उसे “झगड़ालू मिस” कहकर चिढ़ाते थे।

अपनी फितरत के मुताबिक, मिया ने मंडी को यूँ ही नहीं छोड़ दिया।

“मॉम, क्या आप कभी टॉयलेट में गिरी हैं?” मिया ने पूरी गंभीरता से पूछा। “या फिर पहले आप वहीं रहा करती थीं?”

मंडी, जो फोन में गुम थी, पल भर में उसका चेहरा उतर गया। उसे समझ नहीं आया कि लिली इतनी बदल कैसे गई—क्या यह वही डरपोक बच्ची है जो हमेशा उसके सामने दुबक जाती थी?

कड़वा चेहरा बनाए उसने मिया को डांटा।

“लिली, हिम्मत कैसे हुई मुझे जवाब देने की?”

मिया ने होंठ फुलाए और पलटकर बोली, “पहले आपने मुझसे ऐसे बात की। तो मैं आपसे वैसी ही बात क्यों नहीं कर सकती?”

“तू…!”

मंडी तिलमिला उठी। वह ऐसी नहीं थी जो आसानी से बेइज़्ज़ती पी जाए।

यह देख कर कि आसपास कोई नहीं है, उसने एक हाथ मिया की तरफ बढ़ाया। उसके नाखूनों पर रंग-बिरंगी नेल पॉलिश चमक रही थी—नुकीली, खतरनाक। उसने मिया के बाजू में नाखून गड़ा दिए।

तेज़ दर्द से मिया का चेहरा बदल गया, और उसकी आँखों में आँसू भर आए।

लेकिन इससे भी मैंडी का मन नहीं भरा। वह उसे लगातार कोसती रही। “तू छोटी बदतमीज़। इस बार तो मैं बस तुझे सबक सिखा रही हूँ। अगर फिर मेरे सामने ज़ुबान चलाने की हिम्मत की, तो मैं तेरा गला दबा दूँगी।”

मिया ने अपना गुस्सा दबा लिया और मैंडी को कोई जवाब नहीं दिया।

उसके अपने इरादे थे। थोड़ी देर पहले उसने लिली को कहते सुना था कि उसके पापा उसे बहुत प्यार करते हैं। मिया ने तय कर लिया था कि लिली के पिता के सहारे वह इस भयानक औरत को—जो उसे चोट पहुँचाने की हिम्मत कर रही थी—सबक सिखाएगी।

यह देखकर कि मिया अब पलटकर बोलने की हिम्मत नहीं कर रही, मैंडी ने आत्मसंतोष भरी मुस्कान के साथ उसे देखा।

छोटी शैतान। बिल्कुल उस बदकिस्मत औरत की औलाद—माँ पर गई है। बिना सख़्ती के तो ये कभी सुधरेगी ही नहीं।

मैंडि मिया को घसीटते हुए ऑपरेशन थिएटर के बाहर बने इंतज़ार क्षेत्र में वापस ले गई।

मिनट-दर-मिनट, अंदर चल रही जटिल सर्जरी अपने अंत के करीब पहुँच रही थी।

थकी हुई एलेना ऑपरेशन टेबल से पीछे हटी।

नाथन उसके साथ-साथ चल रहा था, जैसे कोई समर्पित सहायक, और उससे माफ़ी माँग रहा था।

“मुझे माफ़ करना, एलेना। मेरी काबिलियत कम होने की वजह से तुम्हें फ्लाइट से उतरते ही सर्जरी करनी पड़ी।”

एलेना ने अपने सर्जिकल ग्लव्स उतारे और माथे से पसीना पोंछा। “कोई बात नहीं। हम सब यहाँ जानें बचाने के लिए हैं।”

नाथन ने उसे भरोसा दिलाया, “ज़ैंडर के पिता की सर्जरी की फीस कल तुम्हारे अकाउंट में ट्रांसफ़र हो जाएगी। मैंने तुम्हारे लिए होटल का कमरा भी तय कर दिया है। थोड़ी देर में पता भेज देता हूँ।”

एलेना ने सिर हिलाया।

उसी वक्त नाथन का असिस्टेंट तेज़ी से वहाँ आया।

“डॉ. पार्कर, मुझे आपको बताना है कि फ्रॉस्ट इंडस्ट्रीज़ के हैरिसन फ्रॉस्ट ने मुझसे संपर्क किया है। वह डॉ. जॉनसन से मिलना चाहते हैं।”

हैरिसन का नाम सुनते ही नाथन की भौंहें सिकुड़ गईं।

“उसे उससे क्या काम है?” उसने पूछा।

असिस्टेंट ने बताया, “उनकी बेटी की तबीयत ठीक नहीं है। वह चाहते हैं कि डॉ. जॉनसन उसे देखें।”

नाथन कुछ पल चुप रहा, फिर बोला, “अगर इलाज चाहिए तो तय तरीके से आए। ऑपरेशन थिएटर के बाहर खड़े होकर डॉ. जॉनसन को घेरने का क्या मतलब है?”

“उनसे कह दो, चले जाएँ। डॉ. जॉनसन ने अभी एक जटिल सर्जरी पूरी की है और वह बहुत थकी हुई हैं।”

“बस यही।”

नाथन ने सख़्ती से असिस्टेंट की बात ठुकरा दी।

असिस्टेंट असहज होकर वहीं खड़ा रह गया। अगर फ्रॉस्ट परिवार सीधे एला से संपर्क कर सकता, तो वे आधा दिन ऑपरेशन थिएटर के बाहर इंतज़ार नहीं कर रहे होते।

यह सोचकर कि उसके बच्चे लाउंज में बहुत देर से इंतज़ार कर रहे होंगे, एलेना ने कपड़े बदले और उधर चल पड़ी।

तभी उसकी दोस्त और असिस्टेंट, शार्लट रोज़ का फोन आया।

“एलेना, मैं हॉस्पिटल के नीचे हूँ। यहाँ पार्क करने नहीं दे रहे। बच्चों को जल्दी नीचे ले आओ।”

एलेना ने “ठीक है” कहा और जल्दी-जल्दी लाउंज में चली गई।

वहाँ सिर्फ कॉनर अकेला बैठा अपने कंप्यूटर पर खेल रहा था। एलेना ने पूछा, “कॉनर, मिया कहाँ है?”

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